संगम नगरी प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल के डॉक्टरों और वकीलों के हुए विवाद का मामला गहराता जा रहा है. हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने इसे लेकर चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन भेजा है. जिसमें पूरे विवाद में दखल देने की मांग की गई है।
इस पिटीशन में यूपी की अदालतों में वकालत करने वाले अधिवक्ताओं की सुरक्षा की मांग की गई है. पुलिस की ज्यादतियों और बल के गैरकानूनी प्रयोग की रोकथाम करने और बार की स्वतंत्रता की रक्षा और अदालतों और कानूनी संस्थानों के शांतिपूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने माँग की कि प्रयागराज और लखनऊ में घटी घटनाओं का अदालत स्वतः संज्ञान लें।
याचिकाकर्ता ने की हाईकोर्ट से अपील
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के कनिष्ठ डॉक्टरों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है. याचिकाकर्ता ने कहा कि इन घटनाओं की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए.
इसके अलावा अधिवक्ताओं के विरुद्ध हिंसा और अत्याचार के लिए जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों/व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का सीधा पंजीकरण रद्द करने का आदेश दें. न्यायालय परिसर, अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी किया जाए.
राज्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देना कि शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने वाले अधिवक्ताओं के विरुद्ध पुलिस बल का अत्यधिक प्रयोग न किया जाए. न्याय के हित में उचित समझे जाने वाले कोई अन्य आदेश या निर्देश पारित करे.
लेटर पिटीशन में यह भी कहा गया है कि इस दयालुता पूर्ण कार्य के लिए, विधि समुदाय और आम नागरिक सदा आभारी रहेंगे. इलाहाबाद हाई कोर्ट अगर इस लेटर पिटीशन को मंजूर करती है तो जल्द ही इस पर सुनवाई भी कर सकती है.
बता दें कि प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में डॉक्टरों और अधिवक्ताओं के बीच मरीज को दिखाने को लेकर तीखी बहस हो गई थी, जिसके बाद विवाद मारपीट तक पहुँच गया था. इस विवाद के बाद दोनों पक्षों में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है वहीं दूसरी तरफ जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर चले गए हैं।
Picture Source :

